Home » National » बेंगलुरु में सीनियर पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या

बेंगलुरु में सीनियर पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या

गौरी लंकेश एक हफ्तावारी अखबार “लंकेश पत्रिका” को कन्नड़ भाषा में चला रहे थे। वह एक निडर, आत्मनिर्भर और खुलकर बोलने वाले पत्रकार थे।

बेंगलुरु (गुरबिंदर सिंह/ JT NEWS TEAM), 6सितंबर :-कट्टड़ हिंदुत्ववादी राजनीति (साम्प्रदायिकता के खिलाफ) के खिलाफ खुलकर बोलने वाली, व्यवस्था विरोधी, गरीब और दलित समर्थक रुख रखने वाली एक जागरूक वरिष्ठ महिला पत्रकार गौरी लंकेश की मंगलवार शाम हमलावरों ने 8 बजे के करीब उनके राजेश्वरी नगर स्थित घर में घुसकर गोलियां मारकर हत्या कर दी। हमलावरों की संख्या तीन बताई जा रही है जिन्होंने घर के बरामदे में खड़ी गौरी पर ताबड़तोड़ फ़ायरिंग शुरू कर दी। 55 वर्षीय गौरी लंकेश अभी अपने घर पहुंचे ही थे, कि तीन अज्ञात व्यक्तियों ने उन्हें नजदीक से गोलियां मारकर उनकी हत्या कर दी। हत्यारों ने 7 राउंड गोलियां चलाईं, गौरी को तीन गोलियां लगी, जिनमें से एक उनके माथे पर लगी और मौक़े पर ही उनकी मौत हो गई । पुलिस पास की एक इमारत में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से हत्यारों की पहचान में जुटी है । पुलिस कमिश्नर टी. सुनील कुमार ने बताया कि कुल 7 राउंड गोलियां चली जिसमें से 4 गोलियां अपने निशाने से चूक गई, जो कि घर की दीवारों पर से मिली। जबकि तीन में से दो गोली उनकी छाती पर और एक गोली उनके माथे पर लगी।
लंकेश कन्नड़ टैबलॉयड ‘गौरी लंकेश पत्रिका’ का संपादन करती थी । कन्नड़ पत्रकारिता में कुछ महिला संपादकों में शामिल गौरी प्रखर कार्यकर्ता थी जो नक्सल समर्थक थीं और वामपंथी विचारों को खुले तौर पर प्रकट करती थी।
मंगलवार शाम मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि एक 3 सदस्यीय पुलिस अधिकारियों की टीम बना दी गई है जो उनकी हत्या की जांच करेगी। दोषी जल्द ही पकड़े जाएंगे।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर गौरी लंकेश की हत्या पर दुख जताया है सच्चाई को कभी ख़ामोश नहीं किया जा सकता गौरी लंकेश हमारे दिलों में ज़िंदा हैं । मेरी संवेदना और स्नेह उनके परिवार के साथ है, दोषियों को सज़ा होनी चाहिए।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने गौरी लंकेश की हत्या पर ट्वीट कर अफसोस जताया है उन्होंने लिखा कि जानी-मानी पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बारे में जानकर स्तब्ध हूं। इस जघन्य अपराध की निंदा करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। ये लोकतंत्र की हत्या है, उनके निधन से कर्नाटक ने एक मज़बूत प्रगतिशील आवाज़ खो दी है, और मैंने एक दोस्त खो दिया है।

यहां यह याद रखने योग्य है कि गोरी लंकेश ने ही राणा अय्यूब की किताब “गुजरात फाइल्स” का कन्नड़ भाषा में अनुवाद किया था और वह अक्सर संघी नेताओं द्वारा फैलाई जा रही दहशत के खिलाफ खुलकर बोलती थी। नवंबर 2016 में उन्हे भाजपा सांसद प्रह्लाद जोशी के विरुद्ध लिखने के कारण मानहानि के मुकदमे में अदालत ने उनको 6 महीने कारावास की सजा सुनाई थी और वह अभी जमानत पर जेल से बाहर थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*