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तुरंत बंद हो राष्ट्रीय संस्थानों का निजीकरण:- मूलनिवासी संघ, पंजाब

प्रधानमंत्री के नाम डिप्टी कमिश्नर, लुधियाना को दिया ज्ञापन

डिप्टी कमिशनर प्रदीप अग्रवाल को माँगपत्र देते हुए मूलनिवासी संघ यूनिट पंजाब का प्रतिनिधि मंडल

लुधियाना (सोनू अम्बेडकर) 28 सितम्बर:– मूलनिवासी संघ यूनिट पंजाब के प्रतिनिधि मंडल की तरफ से प्रधानमंत्री के नाम एक माँगपत्र डिप्टी कमिशनर प्रदीप अग्रवाल को दिया गया इस प्रतिनिधि मंडल की अगुवाई डा. जीवन बसरा सूबा प्रधान मूलनिवासी संघ, पंजाब कर रहे थे। इस माँगपत्र में प्रधानमंत्री से यह माँग की गई है कि राष्ट्रीय संस्थाओं में, जो निजीकरण की नीति चल रही है उसे तुरंत बंद किया जाये ।
प्रतिनिधि मंडल द्वारा माँगपत्र देने के उपरांत हमारे प्रतिनिधि के साथ बातचीत करते हुए मा. बसरा ने कहा कि आज भारतीय सरकार हर एक राष्ट्रीय संस्था का निजीकरण करने पर तुली हुई है। ऐसा करने से देश के धन कुबेरों को तो फ़ायदा हो सकता है परन्तु देश की आम जनता का तो नुक्सान ही नुक्सान है। आज देश का धन कुछ लोगों के हाथों में सिमट कर रह गया है। आम जनता भुखमरी की ज़िंदगी व्यतीत कारण के लिए मजबूर है । यह बड़े शर्म की बात है कि हम दुनिया के दूसरे सबसे बड़े राष्ट्र होने के बावजूद भी हम विकास की जगह गिरावट की तरफ जा रहें है ।
भारतीय सरकार हर राष्ट्रीय संस्था का निजीकरण कर रही है, परन्तु इस के साथ भारत के मूलनिवासी बहुजन (और इन से परिवर्तित धार्मिक कम संख्या के लोगों ) को मिलने वाला, इनकी नुमाईंदगी का हक छीन रही है। हर राष्ट्रीय संस्था में मूलनिवासी बहुजनों को समान नुमाईंदगी का हक है परन्तु सरकार की तरफ से पिछले बैकलोग भी पूरा नहीं किया जा सका है । अब जब इन संस्थाओं का निजीकरण हो जायेगा तब इन का बैकलोग पूरा होना तो एक तरफ़, इनकी बनती नुमाईंदगी भी इन्हे नहीं मिल सकेगी ।
आज हम बुलेट ट्रेन के लिए जापान की तरफ देख रहे है जापान ने हमें बुलेट ट्रेन चलाने के लिए लागत का 81 % पैसा देना भी मंज़ूर कर लिया है परन्तु ऐसा क्यों ? एक बहुत ही छोटा सा देश जिसकी आबादी और क्षेत्रफल हमारे मुकाबले बहुत कम है वह इतना साधन सम्पन्न देश कैसे बन गया? जबकि जापान ही एक अकेला ऐसा देश है जो परमाणु हमले की मार झेल चुका है क्योंकि वह तथागत बुद्ध के सिद्धांत को मानने वाला देश है। बुद्ध, हमारे देश में पैदा हुए और यहाँ ही उन्होंने अपने सिद्धांतों को फैलाया, परन्तु फिर भी हम गिरावट की तरफ जा रहें है। क्या हमें भी बुद्ध के सिद्धांतों के अंतर्गत समता, समानता और भाईचारे के सिद्धांत को अपनाना नहीं चाहिए? ताकि हम भी एक विकसित राष्ट्र बन सकें परन्तु ऐसा नहीं। हम संकुचित मानसिकता में फंस कर लगातार नीचे की ओर जा रहें है ।
हमारी यह माँग है कि हर नागरिक को समान शिक्षा और सेहत सेवाएं मिले ताकि हर नागरिक समान रूप में विकास कर सके और वह देश के विकास में भी उत्साह के साथ योगदान डाल सके। इसलिए हमारी प्रधानमंत्री से अपील है कि वह निजीकरण की नीति को तुरंत बंद कर देने और निजी संस्थायों को भी राष्ट्रीय संस्थायों बनाने की पहल करें , ताकि हमारे देश के सभी नागरिकों को समान विकास का मौका मिल सके। इस के साथ ही सबका साथ और सबका विकास हो सकता है। इस मौके गगनदीप कुमार, बलजिन्दर कौर, गुरबिन्दर सोनू, लाल चंद विरहे, प्रदीप द्रविड़, एडवोकेट इंद्रजीत सिंह, मोहन विर्दी, कमल ज्ञान, कुलजीत कुमार आदि मौजूद थे।

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