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movie review lipstick under my burkha sanskari censor board alankrita shrivastava konkana sen bold content

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फिल्म का नाम: ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’

डायरेक्टर: अलंकृता श्रीवास्तव

स्टार कास्ट: रत्ना पाठक शाह, प्लाबिता बोरठाकुर, कोंकणा सेन शर्मा , अहाना कुमरा, सुशांत सिंह, विक्रांत मास्सी, शशांक अरोड़ा

अवधि:1 घंटा 58 मिनट

सर्टिफिकेट: A

रेटिंग: 3.5 स्टार

कई सालों से प्रकाश झा प्रोडक्शन से जुड़कर ‘अपहरण’, खोया खोया चांद’, ‘राजनीती’ जैसी शानदार फिल्मों में अस्सिटेंट डायरेक्टर के तौर पर काम करने वाली अलंकृता श्रीवास्तव की बहुचर्चित फिल्म’ लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ रिलीज हो गई है. इससे पहले अलंकृता श्रीवास्तव ‘टर्निंग 30’ भी डायरेक्ट कर चुकी हैं. ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ लंबे अरसे से बनकर तैयार थी यहां तक कि ये फिल्म अलग-अलग फिल्म फेस्टिवल में दिखाई भी जा चुकी थी लेकिन भारत में रिलीज से पहले सर्टिफिकेशन बोर्ड और मेकर्स के बीच फिल्म के रिलीज को लेकर काफी गहमागहमी रही. सेंसर बोर्ड की मंजूरी के बाद अब फिल्म इस शुक्रवार रिलीज होने जा रही. आइए रिलीज से पहले फिल्म समीक्षा में जानें कैसी है ये फिल्म:

कहानी

यह कहानी भोपाल में एक ही मोहल्ले में रहने वाली चार महिलाओं ऊषा (रत्ना पाठक शाह), शिरीन (कोंकणा सेन), लीला (अहाना कुमरा) और रिहाना (प्लाबिता बोरठाकुर) की है, जो अलग-अलग तरह से अपनी जिंदगी गुजर बसर करती हैं. ऊषा को लोग बुआ जी के नाम से बुलाते हैं जिनका रुझान रोमांटिक उपन्यासों की तरफ ज्यादा है, वहीं शिरीन एक डोर टू डोर सेल्स वुमन का काम करती है लेकिन अपने पति (सुशांत सिंह) को नहीं बताती है, क्योंकि उसे डर है कि‍ कहीं वो ये जानकार नाराज ना हो जाए, लीला को फोटोग्राफर अरशद (विक्रांत मास्सी) से प्रेम है लेकिन अरशद उसको कम भाव देता है साथ ही लीला की शादी किसी और के साथ फिक्स हो जाती है. रिहाना एक कॉलेज में पढ़ने वाली लड़की है. घर में बंदिशों के चलते वो पिता के साथ सिलाई में हाथ बंटाती है लेकिन जब भी वह घर से बाहर जाती है तो अपनी ही धुन में वेस्टर्न स्टाइल में जीने की कोशिश करती है. कहानी का सार ये है कि‍ ये चारो महिलाएं जो असल जिंदगी में करना चाहती हैं, वो उन्हें चोरी छिपे करना पड़ता है और कहानी का अंत ऐसे मकाम पर होता है जो आपको सोचने पर विवश कर देता है.

क्यों देखें

फिल्म की कहानी काफी सिंपल सी है और एक उपन्यास ‘लिपस्टिक वाले सपने’ के इर्द गिर्द ही घूमती है जो पूरे समय आप रत्ना पाठक शाह के किरदार के हाथ में देखते हैं, और फिल्म का मिजाज इस्मत चुगताई की कहानियों की याद भी दिलाता है.

फिल्म के दौरान समाज में महिलाओं के प्रति हो रहे रूढ़िवादी व्यवहार की तरफ एक बड़ा कटाक्ष किया गया है, जैसे कि महिलाएं काम ना करें, वो सिर्फ बच्चे ही पालें, पर्दे में रहें.

फिल्म की कहानी बहुत ही सिंपल है और उपन्यास इस फिल्म में सूत्रधार की भूमिका निभाता है और उसके इर्द-गिर्द ही फिल्म की कहानी घूमती रहती है. इस पूरी बात को अलंकृता ने बड़े ही अच्छे अंदाज में पर्दे पर उतारा है.

फिल्म को लिखने के अंदाज की तारीफ करना लाज्मी है. फिल्म के शानदार डायलॉग्स कहानी को ओर दिलचस्प बनाते हैं. जिंदगी के ऐसे छोटे-छोटे पलों को भी फिल्म में शामिल करने की कोशिश की गई है जो रोजमर्रा की जिंदगी में आप देख पाते हैं और यही कारण है कि‍ फिल्म से आम आदमी कनेक्ट कर सकेगा.

डायरेक्शन, लोकेशंस, सिनेमेटोग्राफी और एडिटिंग बढ़िया है. साथ ही गांव की लाइफ को भी बड़े ही सटीक तरीके से स्क्रीनप्ले में फिट किया गया है जो कहानी की रफ्तार को नुकसान नहीं पहुंचाता.

फिल्म का हरेक किरदार आपको एक अलग फ्लेवर परोसता है, रत्ना पाठक शाह की उम्दा एक्टिंग, कोंकणा सेन शर्मा का छू जाने वाला अभिनय, अहाना कुमरा का बोल्ड अंदाज और प्लाबिता की बेहतरीन एक्टिंग काबिल-ए-तारीफ है. वहीं इनके अपोजिट सुशांत सिंह, विक्रांत मास्सी, शशांक अरोड़ा जैसे एक्टर्स ने बहुत ही उम्दा अभिनय किया है. फिल्म में किरदारों की बेहतरीन परफॉर्मेन्स कमाल की है, जो आपको हंसाने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर करती हैं.

कमजोर कड़ियां

यह फिल्म कोई मसाला फिल्म नहीं है जिसमें आपको कॉमेडी, फूहड़ जोक्स या आइटम सॉन्ग देखने को मिलेंगे इसलिए सिनेप्रेमियों का शायद एक खास तरह का तपका इसे पसंद ना करे. साथ ही फिल्म को एडल्ट सर्टिफिकेट मिला है जिसकी वजह से सभी लोग इस फिल्म को नहीं देख पाएंगे. इक्का दुक्का कमियां हैं, जिसे नकारा जा सकता है.

बॉक्स ऑफिस

फिल्म का बजट बहुत ज्यादा नहीं है और एकता कपूर ने प्रोडक्शन के साथ-साथ डिस्ट्रीब्यूट करने का जिम्मा भी उठाया है जिसकी वजह से फिल्म को अच्छी रिलीज मिलने की उम्मीद है. रिलीज से पहले विवादों की वजह से फिल्म को वैसे ही बहुत ज्यादा पब्लिसिटी मिल चुकी है. अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि‍ बॉक्स ऑफिस पर कैसा वीकेंड गुजारती है यह फिल्म.

 

 

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