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क्या पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से मिलेगी राहत?

पेट्रोल की कीमतों में गुरुवार को चार पैसे प्रति लीटर तथा डीजल में तीन पैसे प्रति लीटर की कटौती की गई. कंपनियों के इस कदम को कर्नाटक चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. सबके जेहन में एक ही सवाल उभर रहा है कि क्या सरकार जनता को और राहत देगी. इस मामले में सरकार की प्रतिक्रिया सामने आई है.

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को कहा कि सरकार ने कर्नाटक चुनाव के मुद्देनजर पेट्रोलियम कंपनियों को पेट्रोल – डीजल की कीमतों में वृद्धि रोकने का कोई ऑर्डर नहीं दिया है. मतलब साफ है कि फिलहाल सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी को रोकने के पक्ष में नहीं है. प्रधान ने कहा, ‘‘ऐसा कोई भी निर्देश नहीं दिया गया है.’’

उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रतिस्पर्धा लाने के लिए तेल की कीमतों को नियंत्रणमुक्त कर दिया है और इस कदम से वापस नहीं लौटा जा सकता है.’’  प्रधान ने कहा , ‘‘यह सरकार की सोची – समझी रणनीति है कि तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर दाम निर्धारित करें. यदि दीर्घकाल में प्रतिस्पर्धी नहीं लाया गया तो फिर कोई हल नहीं बचेगा. सरकार ने तेल कंपनियों को आजादी दे दी है.’’

गुजरात चुनाव में मिली थी राहत
पिछले साल दिसंबर में गुजरात चुनाव के समय भी तेल कंपनियों ने आश्चर्यजनक तरीके से पहले पखवाड़े में प्रतिदिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 1-3 पैसे प्रति लीटर की कटौती की थी. चुनाव 14 दिसंबर को समाप्त होते ही कंपनियों ने तत्काल दाम बढ़ाना शुरू कर दिया था. इससे कयास उठने लगे हैं कि सरकार ने चुनाव के मद्देनजर कंपनियों को दाम नहीं बढ़ाने के लिए कहा.

इससे पहले पेट्रोलियम कंपनियों ने भी स्पष्ट किया था कि सरकार ने उनसे पेट्रोल-डीजल की मूल्यवृद्धि टालने का कोई निर्देश नहीं दिया है. आईओसी के चेयरमैन संजीव सिंह ने कहा था, ‘‘हमें सरकार से मूल्यवृद्धि टालने के लिए कुछ नहीं कहा गया है.’ एचपीसीएल के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक एम के सुराना ने भी कहा था कि कंपनी को इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि पेट्रोलियम कंपनियों से कीमतें नहीं बढ़ाने को कहा गया है. सरकार ने जून, 2010 में पेट्रोल कीमतों को नियंत्रणमुक्त किया था. अक्टूबर, 2014 में डीजल कीमतों को भी नियंत्रणमुक्त कर दिया गया.

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