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पंजाब सरकार ने 1,650 सर्विस केंद्रों को बंद करने का दिया आदेश, 7000 हुए बेरोजगार

पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी व कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हर घर से नौकरी देने का वादा किया था. ‘घर-घर नौकरी, घर-घर कैप्टन’ का नारा दिया था. साथ ही कांग्रेस के चुनावी मेनिफेस्टो में कई तरीके से यह समझाया गया था कि दिवालियेपन की कगार पर आए पंजाब सरकार के खजाने को कैसे भरा जाएगा? इसमें यह भी बताया गया था कि सूबे में खुदखुशी कर रहे किसान को कैसे खुशहाल किया जाएगा?

खैर….ये वादे तो दूर की बात है, बल्कि जिन लोगों को पंजाब में रोजगार मिला हुआ है और जो किसान शहरों के ज्यादातर काम अपने गांव में ही निपटा लेते हैं, अब उनके परेशानियों के दिन शुरू हो गए हैं. दरअसल, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के ड्रीम प्रोजेक्ट सुविधा केंद्रों को कैप्टन सरकार बंद करने जा रही है. यह कदम सरकारी खजाने की खस्ता हालत के चलते उठाया जा रहा है.

एक ही छत के नीचे मिलती थीं सारी सुविधाएं

बादल सरकार ने गांव के लोगों की सुविधा के लिए इन सर्विस केंद्रों को शुरू किया था. इसमें एक छत के नीचे ग्रामीण को बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने से लेकर बिजली-पानी तक के बिल जमा करने की सुविधा दी जा रही थी. जमीन की फरद हो या राशन कार्ड या फिर वोटर कार्ड सब एक छत के नीचे बन जाते थे, लेकिन खजाने की खस्ता हालत का हवाला देकर पंजाब सरकार 2,147 सर्विस केंद्रों में से 1,650 केंद्रों को अब बंद करने जा रही है.

एक झटके में छिन जाएंगे सात हजार लोगों के रोजगार

इसके चलते एक झटके में करीब सात हजार लोगों का रोजगार छिन जाएगा और किसानों व ग्रामीणों की समस्याएं बढ़ जाएंगी. इतना ही नहीं, एक सुविधा केंद्र को बनाने में उस समय तकरीबन 10 लाख का खर्चा आया था, वो सारा खर्चा भी बेकार चला जाएगा. इन केंद्रों को बंद करने के कैप्टन सरकार के फरमान के बाद से यहां पर कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए कर्मचारियों को सैलरी मिलनी बंद हो गई है. पिछले चार महीने से ठेकेदारों ने इन कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया है. लिहाजा कर्मचारी अब खुद इन केंद्रों पर ताला लगा रहे हैं.

पंजाब में राजनीति गरमाई, अकाली दल और AAP ने बोला हमला

कांग्रेस सरकार के इस फैसले के बाद से सूबे की राजनीति भी गरमा गई है. अकाली दल और आम आदमी पार्टी (AAP) ने सरकार पर हमला बोला है और कहा है कि वे इस मसले को लेकर जनता की अदालत में जाएंगी. साथ ही विधानसभा का सत्र भी नहीं चलने देंगी, क्योंकि कांग्रेस ने घर-घर नौकरी, करप्शन फ्री प्रशासन और किसानों की हितैषी सरकार देने का वादा किया था, लेकिन सरकार एक तरफ करप्शन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है, दूसरी ओर रोजगार छीन रही है और किसानों को परेशान कर रही है.

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