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rahul gandhi super 40 plan failed

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लगातार चुनावी हार के बाद जब यूपी में गठबंधन भी कांग्रेस की नैय्या पार नहीं सका, तो पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुपचुप तरीके से एक प्लान तैयार किया. इस प्लान का सुपर-40 है. जिसके तहत राहुल ने खुद देश भर से कांग्रेस के 40 नेताओं की लिस्ट बनाई. राहुल की कोशिश रही कि, ये वो नेता हों, जो पहले सांसद या विधायक रहे हों और हाल का चुनाव हार गए हों, लेकिन उनका कद बड़ा हो. साथ ही उन सीनियर नेताओं को भी जगह मिली जो संगठन में रहे हों या भविष्य में उनको संगठन में जगह दी जानी हो.

 

इसके बाद खुद राहुल ने 18 अप्रैल 2017 को इन सुपर 40 की मीटिंग बुलाई. इस मीटिंग में पी चिदंबरम भी शामिल हुए. यूपी से पूर्व सांसद राजेश मिश्रा और तीन बार के पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह और राजस्थान से पूर्व सांसद हरीश चौधरी भी इस मीटिंग में मौजद थे. इसी तरह देश भर से कुल 40 नेताओं ने मीटिंग में हिस्सा लिया.

 

राहुल ने मीटिंग में आए नेताओं को बताया कि आप लोग प्रदेशों में जाकर अच्छे और काम करने वाले छोटे नेताओं, कार्यकर्ताओं को तलाशिये. खासकर इसका पता लगाइए कि जो मेहनती कार्यकर्ता हैं, उन्हें तवज्जो मिल रही है या नहीं. या फिर इलाके के बड़े पार्टी नेता ऐसे कार्यकर्ताओं को व्यक्तिगत वजहों से आगे ना आने दे रहे हों. इसके बाद राहुल से फॉर्म भरवाए, जिसमें नेताओं की पसंद का राज्य और वो कितना वक्त दे सकते हैं, इन सवालों के जवाब मांगे गए. इन सभी नेताओं को राहुल ने 6 महीने का वक्त दिया है. साथ ही इन नेताओं को जिला मुख्यालयों में जाकर कम से कम 10 दिन तक वहां रुकने के निर्देश दिए हैं.

 

इसी बैठक में महाराष्ट्र, कर्नाटक और हिमाचल के नेताओं ने कहा कि, उनके राज्यों में चुनाव है, इसलिए वो अपने राज्य में व्यस्त रहेंगे. ऐसे में उन नेताओं से कहा गया कि वो अपने राज्यों के चुनाव होने पर वक्त दें. राहुल ने चिदंबरम को कार्यक्रम की जिम्मेदारी देते हुए भविष्य की रूपरेखा देने की बात कही.

 

ये मीटिंग 18 अप्रैल को हुई थी. मगर अब तक राहुल के सुपर-40 नेता भविष्य के कार्यक्रम और कार्यकर्ता एक खोज में निकलने की बाट ही देख रहे हैं. इन नेताओं का भी मानना है कि शायद कार्यक्रम बंद ही हो जाएगा.

 

इस बारे में कांग्रेस प्रवक्ता संदीप दीक्षित ने कहा कि सुपर 40 एक पार्टी के भीतर का प्लान था, अब उन्हीं में प्रभारी सचिव बन रहे हैं, उनको संगठन में जगह मिल रही है, जिससे अब वो पद पर रहकर वही काम करेंगे. हालांकि, हाल में झारखंड के प्रभारी बने आरपीएन सिंह और छत्तीसगढ़ के प्रभारी बने पीएल पुनिया सुपर 40 में थे ही नहीं.  

 

ऐसे में अब यही लगता है कि तीन महीने बीतने के बाद 6 महीने में कुछ कर दिखाने वाला राहुल का प्लान सुपर 40 सफल या असफल होने से पहले ही ठप्प हो गया है.

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